जाट आरक्षण

हरियाणा सरकार ने जाटों को आरक्षण देने के साथ ही गैर जाटों को भी लुभाने के लिए मास्टर स्ट्रोक चला है। मनोहर सरकार ने जाटों को पिछड़ा वर्ग में ही आरक्षण देने का फैसला लिया है।
बीसी ए और बीसी बी के बाद मनोहर सरकार ने बीसी-सी की नई कैटेगरी में जाटों को 10 फीसदी आरक्षण देने का निर्णय किया है। इस कैटेगरी में जाटों के साथ जट सिख, रोड़, त्यागी और बिश्नोई जातियां को भीरखा गया है।
इसके साथ ही पहले से आरक्षण का फायदा ले रहे अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के लोगों के मौजूदा आरक्षण में एक-एक प्रतिशत का इजाफा किया गया है।
बीसी-सी में मिलेगा जाटों को आरक्षण, एससी और बीसी के आरक्षण में भी एक-एक प्रतिशत की बढ़ोतरी
आज सोमवार को यहां सीएम मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में भविष्य में पिछड़ा वर्ग के लोगों से जुड़ी समस्याओं व मांगों के स्थायी समाधान के लिए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को वैधानिक दर्जा देने का भी फैसला किया गया। इससे, इस वर्ग के लोगों को काफी राहत मिलेगी। इससे राज्य में कुल आरक्षण 70 फीसदी हो जाएगा।————
-किस वर्ग को कितना मिलेगा आरक्षण-अनुसूचित जाति व जनजाति – 21 फीसदी
-पिछड़ा वर्ग (बीसी-ए ) – 16 प्रतिशत-पिछड़ा वर्ग (बीसी-बी ) – 12 प्रतिशत-पिछड़ा वर्ग (बीसी-सी -जाट व अन्य ) – 16 प्रतिशत-सामान्य वर्ग (आर्थिक आधार ) – 10 प्रतिशत————यह होगा
अब आरक्षण का मौजूदा स्वरूप किसी भी राज्य 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता। हरियाणा में अब तक 47 प्रतिशत आरक्षण बंटा हुआ था व तीन प्रतिशत आरक्षण और देने की गुजायिश थी। सरकार ने अनुसूचित जाति के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 21 फीसदी कर दिया है। इसी तरह, पिछड़ा वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण में दो प्रतिशत वृद्धि कर इसे 29 प्रतिशत कर दिया गया है।प
गैर जाटों का भी ध्यान रखेगी सरकार
राज्य में पिछड़ा वर्ग की पहले से दो श्रेणियां हैं। इनमें बीसी-ए श्रेणी में करीब 70 जातियों को 16 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। नए फैसले के बाद यह बढक़र 17 हो जाएगा। इसी तरह दूसरी श्रेणी यानि बीसी-बी में शामिल छह जातियों के मौजूदा 11 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 12 प्रतिशत किया गया है। इससे राज्य में अब 50 प्रतिशत आरक्षण पूरा हाे गया है।
इसके साथ जाट सहित पांच जातियों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने से कुल आरक्षण 60 प्रतिशत हो गया है। यानि राज्य के सिर्फ 40प्रतिशत लोग ही आरक्षण के दायरे से बाहर बचे हैं।
—————सामान्य जातियों को मिलता रहेगा 10 प्रतिशत आरक्षण
पंजाबी, वैश्य, ब्राह्मण और राजपूत समेत अन्य सभी सामान्य श्रेणी की जातियों को पहले की तरह आर्थिक आधार पर ही आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा। इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। हुड्डा सरकार ने इन सामान्य जातियों को आर्थिक आधार पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत की थी।मौजूदा भाजपा सरकार ने जाट एवं खाप प्रतिनिधियों के साथ वार्ता के दौरान उन्हें वैकल्पिक प्रबंध के तौर पर आर्थिक आधार पर पेशकश देने की पेशकश की थी। इसके लिए आर्थिक आधार पर मिल रहे आरक्षण को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने तथा परिवार की आय सीमा को ढ़ाई लाख से बढ़ाकर छह लाख रुपये सालाना करने की बात कही थी।
जाट एवं खाप प्रतिनिधियों द्वारा इस पेशकश को ठुकरा दिया गया था। ऐसे में फिलहाल आरक्षण 10 प्रतिशत है और आय सीमा ढ़ाई लाख रुपये सालाना ही रहेगी।
माना जा रहा है कि अागे सरकार आर्थिक आधार पर वाले आरक्षण पर आय सीमा को बढ़ाकर पांच-छह लाख रुपये कर सकती है।
—————पिछड़ा वर्ग आयोग को मिलेगा वैधानिक दर्जा
अभी तक राज्य में पिछड़ा वर्ग आयोग सरकार के रहमो-करम पर चलता रहा है। सत्ता परिवर्तन के साथ ही इस आयोग का स्वरूप बदलता रहता है।हुड्डा सरकार ने जस्टिस गुप्ता की अध्यक्षता में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया था, जिसकी सिफारिशों के आधार पर ही जाटों, जट सिख, त्यागी, रोड और बिश्नोई को विशेष पिछड़ा वर्ग में 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया गया था।
सूत्रों के अनुसार मनोहर सरकार राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को वैधानिक दर्जा देने जा रही है। इसके लिए बाकायदा विधानसभा में बिलपास करना होगा। बिल पास होने के बाद राज्यपाल के हस्ताक्षर होते ही यह आयोग वैधानिक स्वरूप हासिल कर लेगा। आयोग पिछड़ा वर्ग से जुड़े लोगों की समस्याओं और मांगों की सीधी सुनवाई करेगा और रिपोर्ट सरकार को देगा।।।

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