दलितों के प्रति बढ़ रही नफरत

एक ओर गुजरात के सोमनाथ के समीप ऊना में मरी हुई गाय की खाल उतारने पर दलित युवकों के साथ सरेआम दरिंदगी और दूसरी ओर यूपी भाजपा के उपाध्यक्ष द्वारा दलित नेत्री मायावती को अपशब्द कहना, देशभर में चर्चा और क्रोध का विषय बन गया है। तमाम विपक्षी दलों ने एकजुटता के साथ कल दोनों मुद्दे जोर शोर से संसद में उठाये और सत्ता को झुकने के लिए मजबूर कर दिया।

तथाकथित गौ भक्तों को छठी का दूध याद दिलाते हुए गुजरात के दलितों ने सुरेन्द्रनगर कचहरी में मरी हुई गायें फैंक कर अपनी नाराजगी का जो इजहार किया वह दलित चेतना का एक ऐसा हथियार है जो पूरे जातिवादी समाज को ध्वस्त करेगा, बशर्ते यह हथियार रुकना नहीं चाहिए। दलितों को अपने अपमान का बदला इसी तरह लेना चाहिये। दलित संगठनों की चेतना का ही परिणाम है जो गुजरात सरकार ने तुरन्त मुकदमा दर्ज कर अपराधियों को गिरफ्तार करवाया अन्यथा सरकार मौन धारण कर चुकी थी।

मायावती को अपमानजनक शब्द बोलने वाले भाजपा नेता दयाशंकर को पार्टी से निष्कासित करके भाजपा ने उचित ही किया है। यूपी सरकार ने भी तुरंत मुकदमा दर्ज कर दयाशंकर की गिरफ्तारी के लिये पुलिस टीमों का गठन करके मामले को गंभीरता से लिया है। आरोपी नेता गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गया है।

सदियों से हमारे यहाँ कमरे वर्गों के खिलाफ नफरत का माहौल रहा है। जो वर्ग जितनी मेहनत करता है भारत में उसे उतना ही नीचा समझा जाता है जो हमारी वाहियात सोच को जाहिर करता है। उन्नत राष्ट्रों में मेहनत करने वाले को पूज्य और ठलुआ को नीच माना जाता है, इसीलिए वह उन्नत हैं। हम मेहनत मजदूरी करने वालों को नीच और हेय मानते हैं इसीलिए हम आज भी दुनिया से हजारों साल पीछे हैं। हमारे पिछड़ेपन का मूल कारण हमारे समाज में व्याप्त छूआछूत ही है।

जबसे केंद्र में मोदी सरकार आई है तब से देशभर में दलितों के प्रति नफरत और हिंसा काफी बढ़ गई है। भाजपा ने गुजरात और यूपी के मामले में सख्त रुख अपना कर जातिवादी मानसिकता के उपद्रवी तत्वों को इसी प्रकार कडा सन्देश देना चाहिए।

 

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