पूर्व सैनिकों से रंगदारी वसूलने वाले गैंग को रंगे हाथ पकड़ने के बाद भी छोड़ दिया पुलिस ने।

दिल्ली ट्रांसको लिमटेड के 400 केवी पॉवर हाउस, सेक्टर 5, बवाना नहर, बवाना दिल्ली में तैनात सुरक्षा गार्ड्स से मनोज दुबे और वीएन झा नाम के दो आदमी जबरन धन वसूली करते हुए कल दिनांक 13 जून 2017 को थाना शाहबाद डेरी के इंस्पेक्टर अवनीश त्यागी ने अपनी टीम के साथ रंगे हाथ पकड़ लिए, एसीपी बवाना को पीड़ित गार्ड्स ने कल मिलकर अपनी एक लिखित शिकायत दी थी जिसमें उन्होंने मनोज दुबे और वीएन झा पर नौंकरी से निकलवाने का खौफ दिखाकर हर महीने प्रत्येक गार्ड से 4 हजार रुपये जबरन वसूलने का आरोप लगाया था। एसीपी के निर्देश पर इंस्पेक्टर अवनीश त्यागी ने दबिश देकर मनोज दुबे को 60 हजार रुपये के साथ रंगे हाथ पकड़ लिया। मनोज ने पूछताछ में बताया वह यह रुपये वीएन झा के कहने पर गार्डों से वसूलता है।। मनोज के खुलासे पर पुलिस ने वीएन झा को भी थाने बुला लिया और दोनों से सघन पूछताछ के बाद पूरा मामला रात 11 बजे रोजनामचे में डीडी नम्बर 24 पर दर्ज कर शिकायत कर्ताओं से हस्ताक्षर भी कराए और बरामद रकम को लिफाफों में सील भी किया और बयानों पर भी दस्तखत करा लिए।। मनोज दुबे और वीएन झा द्वारा अपराध कबूल लेने के बाद भी पुलिस ने दोनों व्यक्तियों को थाने से ही छोड़ दिया और उनके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया।।
इंस्पेक्टर अवनीश त्यागी ने शिकायत कर्ता पूर्व सैनिक सुमेर सिंह और बीरेंद्र सिंह को बताया कि मनोज दुबे और वीएन झा के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं बनता फिर भी मैं तुम्हारी शिकायत और बयानों को अपनी रिपोर्ट के साथ सरकारी वकील को भेजकर उससे लीगल ओपीनियन लूंगा, यदि सरकारी वकील कहेगा तो मुकदमा दर्ज कर दूंगा।।
पूरे दिन रोजनामचा रोक कर रखा गया मुकदमा दर्ज करने के लिए और एसीपी सौरभचंद्र ने भी खुद थाने आकर एसएचओ को कहा मनोज दुबे और वीएन झा को एक्सटॉर्शन के केस में हवालात दे दो।
इतनी कार्रवाई और अपराध कबूलने के बाद भी वीएन झा और मनोज दुबे को पुलिस ने क्यों छोड़ दिया और अंतिम समय में केस का जांच अधिकारी क्यों बदल दिया गया यह रहस्य बना हुआ है।।
पीड़ित गार्ड्स के अनुसार दिल्ली सरकार के अधीन संस्थानों में लगभग 10 हजार पूर्व सैनिक ठेका कर्मचारी के रूप में तैनात हैं जिनकी तनख्वाह रक्षा मंत्रालय के पुनर्वास महानिदेशालय द्वारा तय की जाती है।। एक गार्ड की मासिक तनख्वाह लगभग 24 हजार रुपये प्रतिमाह है जिसमें से प्रत्येक गार्ड को हर महीने मनोज दुबे और वीएन झा को उन्हें 4 हजार रुपये नकद देने पड़ते हैं। जो गार्ड इन्हें मंथली 4 हजार रुपये नहीं देता उसे यह ठेकेदार से शिकायत करके नोकरी से निकलवा देते हैं। नौंकरी छूटने के डर से सभी गार्ड मनोज दुबे और वीएन झा को मंथली देते हैं। दुबे और झा को करीब 10 घंटे थाने में बिठाने के बाद भी छोड़ देने की घटना से पूर्व सैनिकों में दुबे और झा का भय और ज्यादा बढ़ गया है। गार्ड्स के अनुसार दुबे और झा ने अब गार्ड्स से 10 हजार रुपये की मंथली मांगी है और धमकी दी है कि अब जो गार्ड 10 हजार रुपये महीना नहीं देगा उसे नौंकरी से लात मारकर निकाल दिया जाएगा।