मजदूर शोषण एवं अत्याचार निवारण अधिनियम 2018 (प्रस्तावित)।

आजादी की 71वीं वर्षगांठ, 15 अगस्त 2018 की पूर्व संध्या पर भारत की 80 फीसदी आबादी यानी मजदूरों को शोषण, उत्पीड़न, अत्याचार, भेदभाव, बेगार एवं बंधुआ मजदूरी से मुक्ति दिलाने के लिए आज 14 अगस्त 2018 को मैं मदन लाल आज़ाद अध्यक्ष अखिल भारतीय मजदूर समाज और संस्थापक माफिया उन्मूलन समिति मजदूर शोषण एवं अत्याचार निवारण अधिनियम 2018 का यह मसौदा देश के समक्ष रख रहा हूँ ताकि भारतवर्ष इस प्रस्तावित क्रांतिकारी कानून पर अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत कर सके।।

यह कानून आगामी 2 अक्टूबर 2018 को पटेलचौक नई दिल्ली में आयोजित होने वाली मजदूर संसद में पेश किया जाएगा और मजदूर संसद इसे पारित करके भारतीय संसद में भेजेगी ताकि यह विधि का रूप लेकर हजारों साल से शोषण गुलामी जिल्लत भूख भय हिंसा और अन्याय सह रहे करोड़ों भारतीय मजदूरों को असली आजादी दिला सके।।

नाम:- मजदूर शोषण एवं अत्याचार निवारण अधिनियम 2018,

विस्तार:- सम्पूर्ण भारतवर्ष,

परिभाषाएं:-

क, मजदूर से अभिप्राय है ऐसा कोई व्यक्ति जो किसी भी स्थान पर किसी कंपनी, ठेकेदार, उपठेकेदार, के मार्फत या मालिक के द्वारा किसी संस्थान, दुकान, मॉल, दूतावास, गोदाम, खेत, फार्महाउस, बागान, कोठी, बंगला, परिवहन, भवन सड़क पुल रेल इत्यादि निर्माण कार्य, गैस एजेंसी, पेट्रोल सीएनजी पीएनजी पम्प, कारखाना, संयत्र, प्लांट, गोदाम, अस्पताल, होटल, रेस्तरां, क्लीनिक, कार्यालय, धार्मिक स्थान, धार्मिक संस्थान, सभी सरकारी गैर सरकारी संगठन संस्था संस्थान ट्रस्ट कार्यालय, सार्वजनिक उपक्रम, बोर्ड, परिषद, निगम, नगरपालिका, न्यायालय, खदान, मोटर कार, ट्रक, टैंकर, टैक्सी, ट्रैक्टर, उद्योग, इत्यादि में बतौर मजदूर, सहायक, चालक, परिचालक, मिस्त्री, माली, स्वीपर, इलेक्ट्रिशियन, ऑपरेटर, लोडर, अनलोडर, चौकीदार, गार्ड, चपरासी, कुली, खल्लासी, बेलदार, कारपेंटर, कारीगर, कुक, मुंशी, क्लर्क, इत्यादि पदों पर मासिक, दैनिक वेतनभोगी अथवा पीसरेट पर अथवा बंधुआ मजदूर के रूप में अथवा किसी कॉन्ट्रैक्ट या सहमति के तहत काम कर रहा है या हो या रहा हो।।

ख, शोषण से अभिप्राय है किसी भी मजदूर को समुचित सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन दर अथवा सरकारी कर्मचारी जो उसी संस्थान में मजदूर के जैसा ही काम करता है उस सरकारी कर्मचारी को मिलने वाले वेतन भत्तों से कम मजदूरी देना और मजदूर को भविष्य निधि, पेंशन, कर्मचारी बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा स्कीम्स से वंचित रखना शोषण माना जायेगा।।

ग, अत्याचार से अभिप्राय किसी मैनेजर, मालिक, ठेकेदार, सुपरवाइजर और अधिकारी द्वारा मजदूर के साथ गाली गलौच एवं मारपीट करना, भोजनावकाश जोड़कर प्रतिदिन 8 घंटे से अधिक काम करवाना, ओवरटाइम न देना, मजदूर का विधिक रिकॉर्ड न बनाना, मजदूर से जोर जबरदस्ती या धोखाधड़ी से या लालच देकर या दबाव बनाकर सादा एवं प्लेन कागजों अथवा प्रिंटेड या लिखित कागजों पर हस्ताक्षर कराना, बैंक खाते में वेतन न देना, सालाना बोनस, अर्जित अवकाश, सवेतन अवकाश न देना, सर्विस मुआवजा, ग्रेच्युटी और प्रतिकर का भुगतान न करना, वेतन में अवैध कटौती करना, नियोजक द्वारा भविष्य निधि और पेंशन में अपना अंशदान जमा न करना, बिना नोटिस, चार्जशीट, मुआवजा, ग्रेच्युटी, वेतन दिए नौंकरी से हटाना, अवकाश न देना जैसे अन्यान्य कृत्य अत्याचार की श्रेणी में आएंगे।।

घ, दंड से अभिप्राय है जो मालिक, मैनेजर, कंपनी, संस्थान, ठेकेदार, बिल्डर, उपठेकेदार, डीलर, निदेशक, इंचार्ज, नियोजक, प्रधान नियोजक, इत्यादि मजदूर का शोषण करेगा या उसके साथ अत्याचार करेगा तो उसे जुर्माने के साथ साथ दण्डित भी किया जाएगा और यह दण्ड न्यूनतम 7 वर्ष की सख्त कैद और अवैध कटौती का 20 गुणा राशि का जुर्माना होगा, जुर्माना राशि का 75 फीसदी पीड़ित मजदूर को दिया जाएगा और 25 फीसदी राजकोष में जमा किया जाएगा।। जुर्माना राशि पर बैंक की दर से भुगतान के समय का ब्याज लगाया जाएगा।।

द, अभियोग से अभिप्राय है कि कोई भी पीड़ित मजदूर अपने शोषण उत्पीड़न और अत्याचार की शिकायत स्वयं या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से नजदीकी श्रमिक पुलिस चौकी अथवा श्रमिक पुलिस थाने में करेगा जिसपर मुकदमा दर्ज करना पुलिस की अनिवार्य ड्यूटी होगी, मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस अधिकारी आरोपी/आरोपियों को गिरफ्तार करके उनसे पूछताछ करेगा और उन्हें सम्बंधित रिकॉर्ड एवं दस्तावेज के साथ 24 घंटे के अंदर क्षेत्रीय दंडाधिकारी के समक्ष पेश करेगा, दंडाधिकारी को किसी भी आरोपी को जमानत देने का अधिकार नहीं होगा। पुलिस अधिकारी विशेष श्रम न्यायालय (जिला एवं सत्र न्यायालय) में एक सप्ताह के अंदर अभियोग पत्र दाखिल करेगा और विशेष न्यायालय अधिकतम 30 कार्य दिवसों में आरोपियों को दंडित कर उनसे जुर्माना और पीड़ित मजदूर के लाभांश और कमाई हुई मजदूरी वसूलकर पीड़ित/पीड़ितों को दिलवाएगा। यदि कोई पक्ष अपील में जाता है तो ऊपरी अदालतें केवल 2 माह में निर्णय सुनाएंगी, यदि ऊपरी अदालत दो माह के अंदर फैसला सुनाने में असमर्थ रहती है तो विवाद को स्वतः ही मजदूर के पक्ष में मानकर श्रम न्यायालय अपराधियों की संपत्ति कुर्की की कार्रवाई आरम्भ कर देगी।।
(इस कानून के किसी भी प्रावधान में कोई फेरफार, छेड़छाड़, संशोधन का अधिकार किसी भी न्यायालय, विधानमंडल, सरकार, कार्यपालिका को नहीं होगा, केवल संसद ही इसमें कोई संसोधन ला सकती है।)

ध, लापरवाही से अभिप्राय है कि कोई भी भारसाधक पुलिस अधिकारी या अन्य अधिकारी मजदूर की शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं करता या सूचना मिलने पर प्रधान नियोजक या सम्बंधित अधिकारी 24 घंटे के अंदर मजदूर को न्यूनतम वेतन इत्यादि लाभांश नहीं दिलाता और मजदूर का उत्पीड़न करने वाले अधिकारी ठेकेदार उपठेकेदार इत्यादि के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई नहीं करता तो उसके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज होगा और उसे भी 3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा होगी।।
(इस अधिनियम के तहत दर्ज कोई भी अपराध जमानतीय नहीं होगा, मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार नहीं होगा न कोई जांच अधिकारी स्वविवेक से किसी आरोपी को बिना गिरफ्तार किए रिहा कर सकेगा।। जांच अधिकारी आरोपी/आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करके मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करेगा और मजिस्ट्रेट आरोपी/आरोपियों को अविलंब न्यायिक हिरासत में जेल भेजेगा।)

न, श्रम न्यायधीश और श्रमिक थाने से अभिप्राय है कि समुचित सरकार हर जिले में एक विशेष त्वरित श्रम न्यायाधीश, 20 किलोमीटर के दायरे में एक श्रमिक पुलिस स्टेशन और लोक अभियोजक की नियुक्ति करेगी जो मजदूर हितों की संरक्षा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके न्यायिक/अधिकार क्षेत्र में किसी मजदूर का शोषण उत्पीड़न न हो।।

प, न्यूनतम मजदूरी से अभिप्राय है कि केंद्रीय सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी प्रांत में न्यूनतम मजदूरी दर किसी भी मजदूर के लिए (मनरेगा मजदूरों सहित) केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अधिसूचित मजदूरी दर से कम न हो और केंद्र सरकार भी न्यूनतम मजदूरी दर को सार्वजनिक उपक्रमों में तैनात निदेशकों के वेतन के समतुल्य बनाये रखेगी।।

फ़, रोजगार और न्यूनतम वेतन की गारंटी से अभिप्राय है कि राज्य अथवा केंद्र सरकार अथवा कोई भी संस्थान कारखाना इत्यादि जहां कोई काम स्थायी रूप से होता है अथवा साल में 7 माह होता है तो वहां नियोजित किये गए किसी भी मजदूर को 50 वर्ष की आयु पूर्ण करने से पूर्व ठेकेदार बदलने पर भी नौंकरी से नहीं हटा सकते।। (अपवाद यदि मजदूर चोरी करते हुए, नशे की स्थिति में या अन्य किसी आपराधिक कर्म में ड्यूटी के दौरान पकड़ा जाता है तो उसे नौंकरी से हटाया जा सकता है परंतु पहले उसे नोटिस और चार्जशीट दी जाएगी)

ब, कर्मचारी भविष्य निधि एवं पेंशन, कर्मचारी राज्य बीमा, बोनस, प्रतिकर, उपादान के दायरे में वह संस्थान अथवा मालिक ठेकेदार एनजीओ ट्रस्ट इत्यादि भी होंगे जो किसी एक कर्मचारी को भी दैनिक मासिक वार्षिक या किसी भी आधार पर कहीं भी नियोजित करते हैं।
(संसद अथवा किसी भी विधानमंडल, राष्ट्रपति, राज्यपाल द्वारा इस कानून से पूर्व बनाया गया कोई भी कानून संहिता अनुच्छेद नियम अध्यादेश उपनियम इत्यादि इस कानून को प्रभावित नहीं करेगा)

अनिवार्य नियम:-
चूंकि श्रमिकों की जनसंख्या देश की जनसंख्या के दो तिहाई से भी अधिक है इसलिए प्राकृतिक न्याय का अनुपालन करते हुए
केंद्र एवं राज्य सरकार अपने बजट का कुल दो तिहाई भाग श्रम मंत्रालय, श्रमिक न्यायालय, श्रमिक थाने और श्रमिकों से जुड़ी अन्य एजेंसीज विभाग और श्रमिक कल्याण योजनाओं पर खर्च करेंगी।।
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श्रमिक ही भारत हैं और जो भारत की सम्पदाएँ हैं उन सब पर श्रमिकों का ही अधिकार है।। श्रमिकों को उनके अधिकार से वंचित करने वाले भारत के दुश्मन हैं।। अतः आप सबसे अनुरोध है कि आगामी 2 अक्टूबर 2018 को सुबह 10 बजे मजदूर संसद में भाग लेने पटेलचौक संसद मार्ग, नई दिल्ली अवश्य पधारें।।

आप अपने सुझाव और विचार हमें ईमेल वेबसाइट व्हाट्सप्प और दूरभाष के माध्यम से भेज सकते हैं। आप स्वयं आपके मित्र आपके सुझाव और विचार सादर आमंत्रित हैं।

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