अकाल के हालात

*अकाल के हालात*।।
देश के कई राज्यों में अकाल के हालात बन रहे हैं। कहते हैं जिस देश का राजा व्यापारी हो या निसन्तान तो वहां अकाल पड़ता ही है उसे कोई रोक नहीं सकता।। उड़ीसा, तमिलनाडु, झारखंड, छत्तीसगढ़,
गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में किसानों की आत्महत्या की खबरें विचलन पैदा करती हैं।

राजा इन आत्महत्याओं से देश का ध्यान हटाने के लिए मीडिया और भक्तों के माध्यम से ऐसा माहौल बना रहे हैं जैसे सब कुछ उत्तम ही उत्तम है।। नकली राष्ट्रभक्ति की चासनी में घटनाओं को लपेटकर ऐसे दिखाया जा रहा है मानो देश में रोजी रोटी भूख और शोषण कोई समस्या ही न हो।
राजधानी दिल्ली में किसान और मजदूर के समक्ष जितने भयावह हालात हैं उन्हें देखकर पूरे देश की स्थिति का आकलन आसानी से किया जा सकता है। केंद्रीय श्रमायुक्त कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार गत 2 वर्षों में उसने जितने बुरे दिन देखें हैं उतने कभी नहीं देखे।। मजदूर शिकायतों का निपटारा करने के लिए श्रमायुक्त कार्यालयों में सम्मन नोटिस भेजने के लिए स्टाफ तो दूर डाक टिकट तक नहीं हैं। अदालतों में जितना भी ठेकेदारी वाला स्टाफ था वह सब हटा दिया गया है और काम के बोझ तले दबी अदालतें फास्ट ट्रैक तो छोड़ो कछुआ गति से भी काम नहीं कर पा रहीं।
सीबीआई पुलिस अदालत आयोग सहित जितनी भी परिवर्तन एजेंसीज हैं सब पंगु बन चुकी हैं, स्टाफ और संसाधनों की कमी के चलते कई आयोगों के दफ्तरों पर ताले लटके हुए हैं। पीड़ित जनता कहाँ जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराए यह उसकी समझ में नहीं आ रहा। मीडिया सब सुंदर ही सुंदर दिखा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता गाय, सेना, मन्दिर और अम्बेडकर सावरकर में उलझे हुए हैं इधर देश में मेहनतकश जनता के समक्ष भूखों मरने की स्थिति बनती जा रही है।