असली ईश्वर कौन

*🌅🌹सूर्य ही सर्वेश्वर सूर्य ही जगदीश्वर हैं🌹🌅*

सूर्य आत्मा जगत्स्तथुषश्च – ऋग्वेद 🌞🌞🌞🌞 ज्योतिषां रविरंशुमान – गीता 🌅
वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है। समस्त चराचर जगत की आत्मा सूर्य ही है। सूर्य से ही इस पृथ्वी पर जीवन है, यह आज एक सर्वमान्य सत्य है। वैदिक काल में आर्य सूर्य को ही सारे जगत का कर्ता धर्ता मानते थे। सूर्य का शब्दार्थ है सर्व प्रेरक.यह सर्व प्रकाशक, सर्व प्रवर्तक होने से सर्व कल्याणकारी है। ऋग्वेद के देवताओं में सूर्य का महत्वपूर्ण स्थान है। यजुर्वेद ने “चक्षो सूर्यो जायत” कह कर सूर्य को संसार का नेत्र माना है। छान्दोग्यपनिषद में सूर्य को प्रणव औंकार ॐ निरूपित कर उनकी ध्यान साधना से पुत्र प्राप्ति का लाभ बताया गया है। ब्रह्मवैर्वत पुराण तो सूर्य को ही परमात्मा मानता है। प्रसिद्ध गायत्री मंत्र सूर्य परक ही है। सूर्योपनिषद में सूर्य को ही संपूर्ण जगत की उतपत्ति का एक मात्र कारण निरूपित किया गया है। और उन्ही को संपूर्ण जगत की आत्मा तथा ब्रह्म बताया गया है। सूर्योपनिषद की श्रुति के अनुसार संपूर्ण जगत की सृष्टि तथा उसका पालन सूर्य ही करते है। सूर्य ही संपूर्ण जगत की अंतरात्मा हैं। अत: कोई आश्चर्य नही कि वैदिक काल से ही भारत में सूर्योपासना का प्रचलन रहा है। पहले सूर्योपासना मंत्रों से होती थी। बाद में मूर्ति पूजा का प्रचलन हुआ तो यत्र तत्र सूर्य मन्दिरों का निर्माण हुआ। भविष्य पुराण में ब्रह्मा विष्णु के मध्य एक संवाद में सूर्य पूजा एवं मन्दिर निर्माण का महत्व समझाया गया है। अनेक पुराणों में यह आख्यान भी मिलता है, कि ऋषि दुर्वासा के शाप से कुष्ठ रोग ग्रस्त श्री कृष्ण पुत्र साम्ब ने सूर्य की आराधना कर इस भयंकर रोग से मुक्ति पायी थी।
श्रीराम ने भी लंका विजय करने के लिए कोणार्क में सूर्य की आराधना की थी, संसार के प्रथम तर्कवादी कबीर रविदास और नानक ने भी कहा है एक नूर से सब जग उपज्या,
सत श्री अकाल महाकाल भी सूर्य के निमित्त ही आया है। समय चक्र की गड़ना सूर्य के बिना असम्भव है।। सभी धर्मों में ज्योति पूजा का जो विधान है वह सूर्य का ही प्रतीक है। संसार के तमाम आदिवासी समुदाय आज भी केवल सूर्य की ही पूजा ईश्वर के रूप में करते हैं। सूर्य के अलावा अन्य कोई पूजा आराधना के योग्य नहीं यह स्वतः सिद्ध है।

प्राचीन काल में भगवान सूर्य के अनेक मन्दिर भारत में बने हुए थे। उनमे आज तो कुछ विश्व प्रसिद्ध हैं। वैदिक साहित्य में ही नही आयुर्वेद, ज्योतिष, हस्तरेखा शास्त्रों में सूर्य का महत्व प्रतिपादित किया गया है। जितना संसारभर के ग्रन्थ और विज्ञान ने अब तक सूर्य के विषय में बताया है वह सब सूर्य की महिमा का एक अंश भी नहीं है। सूर्य वह परम शक्ति है जिसके बारे में जितना जानने की कोशिश करोगे वह उतना ही गहरा होता जाएगा। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि सूर्य को पूर्णतः आज तक न कोई जान सका है न जान पायेगा। वेदों ने जिसे नेति नेति कहा, बाइबल ने जिसे परमेश्वर गॉड कहा, कुरआन ने जिसे अल्लाह कहा, गुरुओं ने जिसे रब कहा, विज्ञान ने जिसे समस्त शक्तियों का मूल श्रोत कहा वही सूर्य जगतपिता परमात्मा परमेश्वर परमपिता जगदीश सत्यनारायण है। सूर्य की कोई उपमा नहीं अपितु सब ग्रंथ उसी से उपमाएं लेते हैं। कोई सूर्य के अंशमात्र भी समकक्ष नहीं उस जैसा होना तो दिवास्वप्न है। सूर्य कण कण में है और प्रतिपल साक्षात सर्वसुलभ है। उसके लिए किसी मन्त्र ध्यान ताबीज नमाज हज रोजा प्रार्थना हवन यज्ञ मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारे गुरुधाम तीर्थ इत्यादि की आवश्यकता नहीं है। सूर्य का सर्वसुलभता का गुण ही व्यापारियों, ठगों और शैतानों को खटकता है।।
आम जनता यह जान गई कि सूर्य सर्वेश्वर परमात्मा हैं तो ठगी के सब धंधे बन्द हो जाएंगे। जितने भी गुरु सद्गुरु पंडित पॉप पुजारी इमाम भंते योगाचार्य आचार्य ईश्वर धर्म और अध्यात्म के नाम पर दुकान खोले बैठे हैं सब भूखों मरने लगेंगे या फिर हराम खाना छोड़कर मेहनत की रोटी खाने लगेंगे।।
सूर्य किरणों में स्नान करने से संसार के तमाम रोग स्वतः ठीक हो जाते हैं जो प्राणी सूर्य के प्रकाश में मेहनत करते हैं वह कभी बीमार नहीं होते।

*🌅जय शुधर्म जय सूर्य🌅*