किसान अधिकार यात्रा

 

“किसानों के हक़ की लड़ाई सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ रहा है जय किसान आँदोलन”

– योगेंद्र यादव

तमिलनाडु में किसान अधिकार यात्रा का आज तीसरा दिन।

तमिलनाडु में “उलावर उरिमई पयानम : किसान अधिकार यात्रा” का तीसरा दिन का आज पूरा हुआ। आज की यात्रा करीब 185 किलोमीटर की है। आज का पहला दौरा पेरंबलूर जिले के आंदीकुंम्बनुर गांव में सम्पन्न हुआ और दूसरी यात्रा पेरंबलूर के सिरिगुडाल में सम्पन्न हुई। इसके बाद करूर जिले के रासकोण्डाणुर गांव से होते हुए क़िलावेलियुर के किसानों से भी परिचर्चा हुई। आज की यात्रा की समाप्ति नांगावरम में हुई।

इन क्षेत्रों में किसानों के लिए सूखा एक अभिशाप की तरह है। ग्रामीणों से परिचर्चा के दौरान पता चला कि उन्हें अनेक समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है। सूखे की वजह से इस क्षेत्र में फसल उत्पादन में भारी कमी आयी है। किसानों को भोजन की अनुपलब्धता का सामना करना पड़ रहा है। मिड डे मील योजना के तहत बच्चों को गर्मी की छुट्टियों में भी भोजन मिलना चाहिए जो कि नही मिल रहा है।

सभी प्रतिनिधियों ने गाँवों का भ्रमण किया और पाया कि वहाँ एक भी कुएँ मे पानी नही है। ग्रामीणों ने बताया कि गाँव में पाइपलाइन का पानी तीन दिन में एक बार आता है वो भी केवल एक घंटे के लिए। ऐसे में, केंद्र और राज्य सरकारों के प्रति व्किसानों में यापक आक्रोश देखने को मिला।

बातचीत के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि सूखे की वजह से कृषि कार्य दुर्लभ हो गया है। जिसके कारण भोजन के साथ समझौता करना पड़ता है। ऐसे हालात में जब किसान सूखे की मार झेल रहे हैं तभी मिड डे मील की कार्यप्रणाली में भी खामियां नजर आईं। बच्चों को गर्मी की छुट्टियों में मिड डे मील भी नही दिया जा रहा है।

यूथ फ़ॉर स्वराज के कार्यकर्ताओं द्वारा एकत्र आँकड़ों के आधार पर इस क्षेत्र के कृषकों और उनके बच्चों के जीवन स्तर में भारी गिरावट आयी है।

इन गांवों में मनरेगा की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। किसानों को न तो पूरे 150 दिन का रोजगार मिल पा रहा है ना ही उन्हें किये गए श्रम का श्रमदान मिल रहा है। सरकारें 150 दिन रोजगार देने की बात तो कर रही हैं लेकिन इन क्षेत्रों में केवल 4 या 6 दिन के लिए ही रोजगार मिल पा रहा है। कुछ गांवों की स्थिति इतनी विकट है कि किसानों के जॉबकार्ड में तो रोजगार के दिन का विवरण दे दिया गया है लेकिन उन्हें पैसे नहीं मिल पाए हैं। किसानों को चार महीने से न कोई रोजगार और न ही कोई पैसा मिल पाया है।

इन गांवो में मुख्यतः कॉटन और मक्के की उपज होती है। सूखे के कारण किसानों को उत्पादन में 80 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ है। सूखे के कारण किसान कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है। किसानों को NFSA के तहत राशन तो मिल रहा है लेकिन दाल, खाने वाला तेल आदि जरूरी चीजों से उन्हें वंचित रहना पड़ रहा है। फसल बीमा योजना के तहत किसानों ने प्रीमियम तो भर दिया है लेकिन उन्हें क्षतिपूर्ति का क्लेम अभी तक नही मिल पाया है।

किसान अधिकार यात्रा का नेतृत्व कर रहे जय किसान आँदोलन के संस्थापक और स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने किसानों के पक्ष में खड़े रहने का का आश्वासन दिया। उन्होंने किसानों की परेशानियों के संदर्भ में मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखने का वादा भी किया। साथ ही, किसानों के हक़ की लड़ाई के लिए सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक पूरे दम से लड़ने का वायदा भी किया।