तब्बू के जन्म दिन पर विशेष

Huma Naqvi

 

तबु (अभिनेत्री)

जन्मदिवस: 4 नवम्बर, 1970

 

तब्बू (तबस्सुम हाशमी) का जन्म 4 नवम्बर1970 में हैदराबाद में हुआ, तब्बू के पिता का नाम जमाल हाशमी और माता का नाम रिजवाना हैं, हालांकि कुछ स्रोतों से उनके जन्म का वर्ष 1971 होने के भी संकेत मिले हैं। उनके जन्म के तुरंत बाद ही उनके माता-पिता का तलाक़ हो गया। उनकी मां एक स्कूल अध्यापिका थीं एवं उनके नाना-नानी, जो एक स्कूल चलाते थे, सेवा-निवृत्त प्राध्यापक थे। उनके नाना, मोहम्मद एहसान, अंकगणित के प्राध्यापक थे और नानी अंग्रेजी साहित्य की प्राध्यापिका थीं। उन्होंने अपनी पढ़ाई हैदराबाद के सेंट एन्स हाई स्कूल में की. 1983 में तब्बू मुंबई चली गयी एवं उन्होनें दो वर्षों तक वहां के सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज में पढ़ाई की…वे शबाना आज़मी की भतीजी एवं अभिनेत्री फरहा नाज़ की छोटी बहन हैं। उनके घर मुंबई एवं हैदराबाद दोनों जगहों पर हैं।

 

तबस्सुम ‘तब्बू’ हाशमी ने अपने करियर की शुरुआत पंद्रह साल की उम्र में ‘हम नौजवान ‘ (1985) फिल्म से की. इस फिल्म में उन्होंने देव आनंद की बेटी का किरदार निभाया था। एक अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली भूमिका एक तेलुगू फिल्म, कुली नंबर 1 में थी। दिसम्बर 1987 में, बोनी कपूर ने अपनी दो बड़ी फिल्मों, रूप की रानी चोरों का राजा एवं प्रेम, की शुरुआत की. प्रेम में तब्बू को संजय कपूर के साथ लिया गया। यह फिल्म आठ साल में बनकर तैयार हुई. तब्बू ने एक बार मजाक में कहा “मुझे इस दशक का, सबसे ज्यादा इंतज़ार करने वाली नयी अभिनेत्री का अवॉर्ड मिलना चाहिए.” मुख्य किरदार के रूप में हिंदी में उनकी पहली रिलीज़ हुई फिल्म थी पहला पहला प्यार, जो लोगों का ज़रा भी ध्यान आकर्षित नहीं कर पाई. विजयपथ (1994) में अजय देवगन के साथ उनकी भूमिका के बाद वे प्रतिष्ठित हुईं, इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ महिला नवागंतुक अवॉर्ड हासिल हुआ। इसके बाद भी उनकी कई फ़िल्में आयीं, जो बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा पायीं.

 

1996 में, तब्बू की आठ फ़िल्में रिलीज़ हुईं. इनमें से दो फ़िल्में, साजन चले ससुराल एवं जीत काफी सफल रहीं; दोनों ने ही उस साल की टॉप पांच फिल्मों में जगह बना ली. उनकी अन्य महत्वपूर्ण फिल्म माचिस फिल्म समीक्षकों द्वारा काफी सराही गयी थी। इस फिल्म में, सिक्ख आतंकवाद के उदय के समय पकड़ी जाने वाली एक पंजाबी महिला की उनकी भूमिका को बहुत सराहना मिली एवं उन्हें सर्वश्रष्ठ अभिनेत्री का अपना पहला राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड मिला.

 

1997 में रिलीज़ होने वाली उनकी पहली फिल्म थी बॉर्डर . यह फिल्म 1997 के भारत-पाक युद्ध के दौरान लोंगेवाला की लड़ाई से जुड़ी जीवन की सच्ची घटनाओं के बारे में थी। उन्होनें इस फिल्म में सन्नी देवल की पत्नी की भूमिका निभाई थी। उनकी भूमिका इस फिल्म में छोटी थी, लेकिन यह फिल्म 1997 की सबसे बड़ी हिट बनी.उसी वर्ष, उन्होंने समीक्षकों द्वारा सराही गयी फिल्म विरासत में भी भूमिका निभाई. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही; तब्बू को अपने अभिनय के लिए फिल्मफेयर समीक्षक अवॉर्ड मिला.

 

1998 में, हम साथ साथ हैं की शूटिंग के दौरान उनपर अपने सह-कलाकारों सलमान खान, सैफ अली खान, सोनाली बेंद्रे एवं नीलम के साथ कांकणी में दो काले हिरण के शिकार का आरोप लगा था। ये आरोप जल्दी ही हटा लिए गए एवं तब्बू को इन आरोपों से बरी कर दिया गया।

 

1999 में उन्होंने दो सफल बहु-अभिनीत फिल्मों, बीवी नंबर 1 एवं हम साथ साथ हैं, में अभिनय किया। दोनों फ़िल्में उस वर्ष की क्रमशः पहली और दूसरी सबसे बड़ी हिट फ़िल्में रहीं…साथ ही एक और फिल्म “हु तू तू” में भी कम किया…

 

सन् 2000 में, अभिनेत्री ने हेराफेरी और अस्तित्व में अभिनय किया। इनमें से पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर काफी हिट रही, जबकि दूसरी समीक्षकों द्वारा सराही गयी। उन्हें अस्तित्व के लिए, सर्वश्रेष्ठ अभिनय का अपना तीसरा फिल्म फेयर समीक्षक अवॉर्ड मिला…

 

2001 में उन्हें मधुर भंडारकर निर्देशित फिल्म चांदनी बार में देखा गया। एक बार-डांसर के उनके चित्रण को एक सिरे से सभी ने सराहा एवं अपने अभिनय के लिए उन्होनें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अपना दूसरा राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड जीता. समीक्षक तरण आदर्श के शब्दों में, “चांदनी बार पूरी तरह से तब्बू की फिल्म है और इसमें कोई दो राय नहीं.” उनका अभिनय सबसे अधिक अंकों एवं सभी अवॉर्डों का हक़दार है। उनका काम दोषरहित है एवं उनके चरित्र का जो असर दर्शकों के दिल-ओ-दिमाग़ पर पड़ता है वह उनके चरित्र रूपायन की क्षमता के कारण ही है। एक दूसरे समीक्षक के अनुसार ‘अगर कोई अभिनेत्री पूरी फिल्म को अपने कन्धों पर उठा सकती है, तो वह है तब्बू. हमेशा की तरह वो अपने किरदार में निखर उठती हैं।

 

उन्होंने कई तेलुगू फिल्मों में काम किया है, जिनमें से बहुत सी तो काफी सफल थी, मसलन – कुली नंबर 1 एवं निन्ने पेल्लादुत्था. इनमें से दूसरी तो उनकी सबसे अधिक प्रसिद्द व मशहूर फिल्मों में से एक है।

 

2003 में तब्बू ने विलियम शेक्सपियर की मैकबेथ पर आधारित एक फिल्म में अभिनय किया। इसमें इस अभिनेत्री ने लेडी मैकबेथ के चरित्र पर आधारित ‘निम्मी’ का किरदार निभाया. मक़बूल नाम की यह फिल्म विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित थी एवं इसे 2003 में टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित किया गया। यूं तो मक़बूल बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, लेकिन इसे भरपूर प्रशंसा मिली. इसमें तब्बू के अभिनय को बहुत सराहना मिली. समीक्षक रॉनी अहलुवालिया के अनुसार ‘तब्बू एक स्याह किरदार में भी चमकती हैं। बॉलीवुड की सबसे बहुमुखी प्रतिभासंपन्न अभिनेत्री खलनायिका का किरदार ऐसे निभाती हैं, मानो वह उनके स्वभाव का ही हिस्सा हो. वह खतरनाक और सम्मोहक है, पर अपने चेहरे पर एक मासूम भाव रखती है, जिससे वह अपने चरित्र में कहीं अधिक घिनौनी बन जाती हैं। उनका ताने मारने का तरीका उनके चरित्र के हिसाब से बिलकुल सटीक है। उनकी क्रमिक विक्षिप्तता ह्रदय-विदारक है एवं अपने आवेग का उनका अंतिम विस्फोट निस्संदेह फिल्म की विशेषता है। एक अन्य समीक्षक ने कहा, “तब्बू एक जटिल किरदार में अद्भुत नज़र आयीं. इस फिल्म में उनका प्रदर्शन अवॉर्ड के लायक है। चांदनी बार के बाद यह ऐसा दूसरा किरदार है, जिसके लिए उन्हें लम्बे समय तक याद किया जायेगा.”

 

वे फ़ना (2006) में आमिर खान और काजोल के साथ सहायक भूमिका में थीं। यह फिल्म उस वर्ष की चौथी सबसे बड़ी हिट बनी…

 

सन् 2007 में, तब्बू ने अपनी पहली हॉलीवुड फिल्म, मीरा नायर निर्देशित ‘द नेमसेक ‘ में अभिनय किया। यह फिल्म विदेशों में बड़ी हिट हुई. उन्होंने चीनी कम में भी अभिनय किया, जिसमें उन्होंनें एक 34 साल की महिला की भूमिका निभाई जिसे, अमिताभ बच्चन द्वारा अभिनीत, एक 64 वर्षीय आदमी से प्यार हो जाता है। इस फिल्म को समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलीं.तरण आदर्श ने कहा ‘तब्बू अपने दुर्जेय सह-अभिनेता की हावी हो जाने लायक उपस्थिति के बावजूद अपनी पहचान बना लेती हैं। वे उत्कृष्ट हैं। हालांकि यह फिल्म देश के भीतर खूब नहीं चली, लेकिन इसने विदेशों में, ख़ास तौर पर ब्रिटेन और अमेरिका में, अच्छा प्रदर्शन किया।

 

2014 में आपने “हैदर” फिम्ल में काम किया जिसमें कश्मीर के मुद्दे को उठाया गया और जिसकी तारीफ हर तरफ हुई और यह फिल्म काफी पसंद की गई…

 

2015 में द्दृश्यम (Drishyam) में आपने एक पुलिस आफिसर की अभूतपूर्व भूमिका निभाई और फिर से एक बार हमेशा की तरह अपनी अदाकारी की छाप छोड़ दी…

 

नामांकन और पुरस्कार:

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1996 – नेशनल फ़िल्म अवार्ड ( सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री)- माचिस

2001 – नेशनल फ़िल्म अवार्ड ( सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री)- चांदनी बार

 

6 बार फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार-

(4 बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार क्रिटिक्स),

(1 बार फीमेल डेब्यू),

 

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