Published On: Sat, Nov 14th, 2015

दाल के दामों पर बड़ा खुलासा

दालों के अंतराष्ट्रीय सिंडिकेट पर बड़ा खुलासा, 50 रूपए की अरहर कैसे बिकी 175 में

 

नई दिल्ली:  अरहर की आसमान छूती कीमतों पर अरबों रूपए का खेल हो गया. गुजरात के कुछ बड़े सिंडिकेट ने अफ़्रीकी देशों से 40 – 50 रूपए किलो की अरहर देश में 170 -175 में बेचकर रातों रात चार गुना मुनाफा कमाया है. इन सिंडिकेटों के तार नामी गिरामी नेताओं से जुड़े हैं जिसके चलते जांच एजेंसियां इनपर हाथ नही रख पा रही हैं.

 

केन्या से आपरेट हो रहे हैं सिंडिकेट

 

सूत्रों के मुताबिक केन्या और तंज़ानिया में सक्रीय कई अप्रवासी भारतीय व्यापारियों ने मोजांबिक और मलावी जैसे गरीब देशों से बड़े पैमाने पर अरहर की दाल पिछले कुछ महीनों में भारत निर्यात की है. ये व्यापारी अफ्रीका देशों की सरकारों के साथ मिल कर अरबों रूपए की कमाई कर रहे हैं. छोटे छोटे देश निर्यात के लिए हर तरह की कानूनी छूट भी  दे रहे हैं.

 

इंडिया संवाद  ने मोजांबिक में की निर्यातक से बात

 

मोजांबिक और मलावी अफ्रीका के वो देश हैं जहाँ निर्यात के लिए अरहर और अन्य दालों का उत्पादन किया जा  रहा है. इंडिया संवाद ने आज फ़ोन 00258  262  139  44  पर मोजांबिक में एक भारतीय निर्यात कम्पनी से दालों के रेट के बारे में बात की. फ़ोन पर कम्पनी के एजेंट ने बताया की भारी मात्र में ‘पिजन पी’ यानी अरहर की दाल उनके पास स्टॉक में है और उनसे  इम्पोर्ट करने के लिए उनके दुबई स्थित दफ्तर में हम आर्डर दे सकते हैं. एजेंट ने ये भी बताया की पिछले कुछ दिनों में मोजांबिक से दाल भारत निर्यात की गयी है. एजेंट ने कहा की उनकी कम्पनी etgworld का एक दफ्तर मुंबई में भी है और  बाकी ट्रेडिंग की जानकारी वहां से ली जा सकती है.

 

सूत्रों के मुताबिक etgworld  के ग्रुप सीओ जयेश पटेल दालों का आयात निर्यात भी देखते हैं. हालांकि इंडिया संवाद के पास जयेश पटेल के मुनाफा कमाने का कोई हिसाब किताब या दस्तावेज़ नही है पर जानकारी के मुताबिक उनकी कम्पनी अफ्रीका की बड़ी एग्रो एक्सपोर्ट ग्रुप में एक है और भारत में उनका बड़ा नेटवर्क है. बिना साक्ष्य हम जयेश पटेल  की etgworld को इस पूरे स्कैंडल में कसूरवार नही ठहरा सकते क्यूंकि गुजरात के कई और एग्रो बेस्ड ग्रुप  अफ्रीका से दालों का इम्पोर्ट कर रहे हैं.

मोजांबिक  में अभी भी अरहर 50 से 55 रूपए किलो

 

बहरहाल ऐसी जानकारी मिल रही है कि मोजांबिक में अभी भी अरहर 50 रूपए किलो से कम है और निर्यात करने पर दाल का  दाम 55 रूपए से ज्यादा नही होने चाहये. सवाल ये है कि  इतनी सस्ती दाल आखिर भारत में आयात  करके इतनी महंगी क्यों बेची  जा रही है. उधर गुजरात से मिली जानकारी के मुताबिक अडानी के मुंद्रा बंदरगाह पर पिछले कुछ महीनो में विदेश से काफी सारे  एग्रो प्रोडक्ट जिसमे दालें भी शामिल है आयात की गई है. ऐसा कहा जा रहा है की गुजरात के  एक बड़े सिंडिकेट ने दाल का बड़ा कन्साइनमेंट भूमिगत कर रखा है और जब दाल का दाम 150 के ऊपर पहुंचा तो कन्साइनमेंट  को बाजार में उतारा  गया. एक तरह से ये सीधे सीधे चोरबाजारी है. लेकिन सिंडिकेट के सत्ता से तार जुड़े होने के कारण पुलिस इस सिंडिकेट को बेनकाब नही कर पा रही है.

साभार।।।।

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