Published On: Mon, Nov 23rd, 2015

सूर्यवंश ही आदवंश है

? सूर्यवंश ही आदवंश है ?

निसन्देह हम सब सूर्यवंशी (आदवंशी ) हैं। सूर्य ही आदित्य हैं। वह सबका आदि भी हैं और अंत भी।

सूर्य को परमेश्वर मानने से इनकार करने वाले शैतानों ने मानव को जाति धर्म वर्ण और समुदायों में बांटा है। जाति मानव समाज का सबसे बड़ा नासूर है। जब तक जाति रहेगी मानव का शोषण और उत्पीड़न होता रहेगा। जाति का जनक मानव निर्मित धर्म हैं। जब तक यह नकली धर्म हैं तब तक जाति विद्यमान रहेगी।

जाति तोड़ने का एक ही रास्ता है हम असली धर्म और उससे पहले असली ईश्वर को जान लें मान लें। वास्तविक परमेश्वर सूर्य नारायण हैं और असली धर्म उन्ही का बनाया हुआ शुधर्म है जिसे शैतानों ने छल कपट पाखण्ड और माया से ढांपने का षड्यंत्र रचा था।

कुछ लोगों का यह कहना कि परमेश्वर एक शब्द है एक नाद है एक ज्योति है एक रहस्य है एक प्रकाश है। यह अधूरा सत्य है। परमेश्वर केवल एक नाद शब्द प्रकाश ज्योति रहस्य नहीं है वह सब कुछ है। कोई भी आवाज शब्द ज्योति अक्षर सूर्य के बिना नहीं है। सूर्य सर्वेश्वर है। वही शब्द नाद अक्षर ज्योति प्रकाश और सबका आधार है जीवन है। बिना सूर्य के आप किसी की कल्पना भी नहीं कर सकते।

कुछ लोग कहते हैं सूर्य और उसके धर्म शुधर्म में अध्यात्म का अभाव है। अरे मूर्खो बिना सूर्य के कोई अध्यात्म नहीं है।

विपश्यना साधना योग ज्योतिष समय शब्द नाद संगीत जल हवा आग पृथ्वी सब तो सूर्य से ही संचालित हैं। कण कण और छण छण में व्याप्त सूर्य ही सर्वशक्तिमान परमात्मा हैं।

चूंकि सूर्य को जानने के लिए किसी दलाल बिचौलिए गुरु इत्यादि की जरुरत नहीं थी न है न रहेगी इसीलिए ठगों ने सूर्य को ईश्वर मानने से इनकार करते हुए अपने नए धर्म और नए अल्लाह बना लिए।

सूर्य ही सबका परमपिता है। हम सब उसी की संतान हैं। बिना उसके जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। सूर्य के आलावा किसी अज्ञात शक्ति को ईश्वर खुदा अल्लाह मान लेना एक पाखण्ड है। यह पाखण्ड फैलाने के पीछे एक गहरी साजिश थी। नकली ईश्वर नकली धर्म बनाकर शैतान ने पहले इंसानो को बांटा फिर उनमे आपस में नफरत पैदा की और उन्हें धर्म के नाम पर अध्यात्म के नाम पर अपना गुलाम बना लिया।

मानव समाज को गुलाम बनाये रखने के लिए।सत्ता धन पद पूजा और हवश के पुजारियों ने काल्पनिक ईश्वर और काल्पनिक धर्मो की रचना की।

भोले भाले किसान मजदूर मेहनतकश शिल्पकार शैतानी जाल में आज तक फंसे हुए हैं। हम सब आदवंशी सूर्य की संतान  हैं। हमारा एक ही धर्म एक ही वंश एक ही अंश है वह है शुधर्म यानी परमात्मा का बनाया हुआ शुद्ध धर्म शुधर्म।

हम नकली धर्मो के मकड़जाल में फंसकर अपने असली खुदा सूर्य सर्वेश्वर को भूलकर नकली ईश्वरों की ओर भगाए जा रहे हैं ताकि 15 फीसदी व्यापारी हमें गुलाम बनाये रखें। यह 15 फीसदी व्यापारी ही जैन बुद्ध ईसाई मुसलमान हिन्दू पारसी यहूदी सिक्ख जैसे धर्मो के रचियता और मालिक हैं। हम 85 फ़ीसदी किसान मजदूर शिल्पकार पशुपालक मत्स्यपालक इत्यादि मेहनतकश समूह अपने असली ईश्वर को जानते हुए भी नहीं मान पा रहे इसीलिए हमारा शोषण दमन उत्पीड़न और भय ख़त्म नहीं हो पा रहा।

आओ हम सब शुधर्मी बनें और परमपिता सूर्य के अक्षय भण्डार पर खुद कब्जा करें। खुद प्राकृतिक संसाधनों के स्वामी बनें क्यों कि संसार की हर वस्तु हमारे परमपिता सूर्य का अंश है और हम उसके वंशज हैं इसीलिए संसार पर पहला अधिकार हमारा है।

जय शुधर्म।।।

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